पैसों के बारे में अमीर लोग अपने बच्चों को ऐसा क्या सिखाते हैं, जो गरीब और मध्यम वर्ग के माता-पिता नहीं सिखाते !
क्या स्कूल बच्चों को असली जिंदगी के लिए तैयार करता है? मेरे मम्मी-डैडी कहते थे, ""मेहनत से पढ़ो और अच्छे नंबर लाओ क्योंकि ऐसा करोगे तो एक अच्छी तनख़्वाह वाली नौकरी मिल जाएगी।" उनके जीवन का लक्ष्य यही था कि मेरी बड़ी बहन और मेरी कॉलेज की शिक्षा पूरी हो जाए। उनका मानना था कि अगर कॉलेज की शिक्षा पूरी हो गई तो हम ज़िंदगी में ज़्यादा कामयाब हो सकेंगे। 1996 में एक दिन मेरा बेटा स्कूल से घर लौटा। स्कूल से उसका मोहभंग हो गया था। वह पढ़ाई से ऊब चुका था। "मैं उन विषयों को पढ़ने में इतना ज्यादा समय क्यों बर्बाद करूँ जो असल जिंदगी में मेरे कभी काम नहीं आएँगे?" उसने विरोध किया। बिना सोचे-विचारे ही मैंने जवाब दिया, "क्योंकि अगर तुम्हारे अच्छे नंबर नहीं आए तो तुम कभी कॉलेज नहीं जा पाओगे।" "चाहे में कॉलेज जाऊँ या न जाऊँ, " उसने जवाब दिया, "मैं अमीर बनकर दिखाऊँगा।" "अगर तुम कॉलेज से ग्रैजुएट नहीं हुए तो तुम्हें कोई अच्छी नौकरी नहीं मिलेगी, "मैंने एक माँ की तरह चिंतित और आतंकित होकर कहा| "बिना अच्छी नौकरी के तुम किस तरह अमीर बनने के सपने देख सकते हो?" मेरे बेटे ने मुस्कराकर अपने सिर को बोरियत भरे अंदाज़ में हिलाया | हम यह चर्चा पहले भी कई बार कर चुके थे। उसने अपने सिर को झुकाया और अपनी आँखें घुमाने लगा। मेरी समझदारी भरी सलाह एक बार फिर उसके कानों से भीतर नहीं गई थी।हालाँकि वह स्मार्ट और प्रबल इच्छाशक्ति वाला युवक था परंतु वह नम्र और शालीन भी था। "मम्मी," उसने बोलना शुरू किया और भाषण सुनने की बारी अब मेरी थी । "समय के साथ चलिए! अपने चारों तरफ देखिए; सबसे अमीर लोग अपनी शिक्षा के कारण इतने अमीर नहीं बने हैं। माइकल जॉर्डन और मैडोना को देखिएश यहाँ तक कि बीच में ही हार्वर्ड छोड़ देने वाले बिल गेट्स ने माइक्रोसॉफ्ट कायम किया। आज वे अमेरिका के सबसे अमीर व्यक्ति हैं और अभी उनकी उम्र भी तीस से चालीस के बीच ही है। और उस बेसबॉल पिचर के बारे में तो आपने सुना ही होगा जो हर साल चालीस लाख डॉलर से ज्यादा कमाता है जबकि उस पर 'दिमागी तौर जोर" होने का लेबल लगा हुआ है। अच्छी शिक्षा और अच्छे ग्रेड हासिल करना अब सफलता की गारंटी नहीं रह गए थे और हमारे बच्चों के अलावा यह बात किसी की समझ में नहीं आई थी। "मम्मी," उसने आगे कहा "मैं डैडी और आपकी तरह कड़ी मेहनत नहीं करना चाहता आपको काफ़ी पैसा मिलता है और हम एक शानदार मकान में रहते हैं जिसमें बहुत से क़ीमती सामान हैं। अगर मैं आपकी सलाह मानूँगा तो मेरा हाल भी आपकी ही तरह होगा। मुझे भी ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी ताकि मैं ज्यादा टैक्स भर सकूँ और कर्ज में डूब जाऊँ। वैसे भी आज की दुनिया में नौकरी की सुरक्षा बची नहीं है। मैं यह जानता हूँ कि छोटे और सही आकार की फ़र्म कैसी होती है। मैं यह भी जानता हूँ कि आज के दौर में कॉलेज के स्नातकों को कम तनख्वाह मिलती हैं जबकि आपके ज़माने में उन्हें ज़्यादा तनख्वाह मिला करती है। डॉक्टरों को देखिए। वे अब उतना पैसा नहीं कमाते जितना पहले कभी कमाया करते थे। मैं जानता हूँ कि मैं रिटायरमेंट के लिए सामाजिक सुरक्षा या कंपनी पेंशन पर भरोसा नहीं कर सकता | अपने सवालों के मुझे नए जवाब चाहिए।" वह सही था। उसे नए जवाब चाहिए थे और मुझे भी मेरे माता-पिता की सलाह उन लोगों के लिए सही हो सकती थी जो 1945 के पहले पैदा हुए थे पर यह उन लोगों के लिए विनाशकारी साबित हो सकती थी जिन्होंने तेज़ी से बदल रही दुनिया में जन्म लिया था। अब मैं अपने बच्चों से यह सीधी सी बात नहीं कह सकती थी, "स्कूल जाओ, अच्छे ग्रेड हासित करो और किसी सुरक्षित नौकरी की तलाश करो।" मैं जानती थी कि मुझे अपने बच्चों की शिक्षा को सही दिशा देने के लिए नए तरीक़ो की खोज करनी होगी। एक माँ और एक अकाउंटेंट होने के नाते मैं इस बात से परेशान थी कि स्कूल में बच्चों को धन संबंधी शिक्षा या वित्तीय शिक्षा नहीं दी जाती। हाई स्कूल ख़त्म होने से पहले ही आज के युवाओं के पास अपना क्रेडिट कार्ड होता है। यह बात अलग है कि उन्होंने कभी धन संबंधी पाठ्यक्रम में भाग नहीं लिया होता है और उन्हें यह भी नहीं पता होता है कि इसे किस तरह निवेश किया जाता है। इस बात का ज्ञान तो दूर की बात है कि क्रेडिट कार्ड पर चक्रवृद्धि ब्याज की गणना किस तरह की जाती हैं। इसे आसान भाषा में कहें तो उन्हें धन संबंधी शिक्षा नहीं मिलती और यह ज्ञान भी नहीं होता कि पैसा किस तरह काम करता है। इस तरह वे उस दुनिया का सामना करने के लिए कभी तैयार नहीं हो पाते जो उनका इंतजार कर रही हैं। एक ऐसी दुनिया जिसमें बचत से ज्यादा ख़र्च को महत्व दिया जाता है।
तो इससे हम सीखते हैं कि पैसे कमाने ओर बचत के बारे में हमें बचपन में ही सीखना चाहिए जो स्कूलों में नहीं सीखाया जाता है।
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