कनकी और मंकी 2 सौतेली बहने थी कनकी बहुत सुंदर और होशियार थी कनकी की मां उसके बचपन में ही गुजर गई थी उसके पिता ने कनकी के अच्छे लालन-पालन के लिए दूसरा विवाह कर लिया था विवाह के बाद उनकी दूसरी बेटी मंकी का जन्म हुआ था
मंकी की मां कनकी को बिल्कुल भी पसंद नहीं करती थी मंकी का रंग रूप और गुण कंट्री से कम था इसलिए मंकी और उसकी मां कनकी से ईर्ष्या करते थे
कल की बहुत सीधी-सादी और भोली लड़की थी उसने अपने और मंकी में कभी कोई भेदभाव नहीं रखा मैं अपनी हरजीत मंकी से बांटा करती थी उसके पिता काम के सिलसिले में सवेरे घर से निकलते और रात को घर लौटते
धीरे-धीरे कनकी और मंक बड़ी होने लगी मंकी गेम मंकी का अधिक ध्यान रखती थी खूब खिलाड़ी बिना तीज फिर भी कनकी का ही रंग रूप और कद काठी दिनों दिन निकाल रहा था
इसी बात से मन की और उसकी मां बहुत दुखी रहती थी और कनकी से बहुत अधिक ईर्ष्या करने लगी थी
कनकी के ननिहाल का मिलना था जो उसकी मां कनकी के लिए छोड़ गई थी कल कि उसे अपना भाई मानती थी और उसी के साथ अपना ज्यादा वक्त बिता दी थी मैंने भी गंदगी को बहुत मानता था उसे प्यार करता था कनकी अपने मीठे स्वभाव के कारण पूरे गांव की चहेती बन चुकी थी मंकी और उसकी मां को यह सब खलने लगा था
1 दिन मंकी की मां ने सोचा अगर कनकी का भोजन कम कर दिया जाए और उसे रूखी सूखी रोटी मिले तो वह भला कैसे निकलेगी जबकि मंकी को दूध नहीं मिले फल आदि अच्छे अच्छे भगवानों के साथ भोजन में दूं तो मन की कंघी से अधिक पुष्ट और सुंदर हो जाएगी
अगले दिन मन की थी मां ने कनकी को बुलाया और कनकी को मिलने को चढ़ाने के लिए बाहर भेज दिया उसने कंगी को चेतावनी दी कि जब तक चढ़ते चढ़ते मैंने का पेट ऊपर ना आ जाए तब तक मिलने को लेकर घर पर ना लौटना
कनकी अपने मुंह बोले भाई मिलने को लेकर घर के पिछवाड़े वाली बेर के पेड़ तले चराने चली गई अब्दुल है सवेरे से शाम तक मैंने को चढ़ा दिए और शाम को घर लौट आती
इस दौरान मंकी की मां खूब अच्छे-अच्छे पकवान बनाती और मंकी को खिला देती कनकी के लिए रूखी सूखी एक आधा रोटी रख देती शाम को कनकी जब मैंने कोचरा कर आती तो गैरों की सूखी रोटी उसे मिलती उससे कनकी का पेट नहीं भरता और मैं भूखी रह जाती है दुबली होने लगी
1 दिन में ना जब बेल की पत्तियां खा रहा था तो कल कि अपना सिर्फ अपनों के बीच में देकर सुबक सुबक कर रो रही थी मैं बिना कई दिनों से कंघी को उदास और दुखी देख रहा था आज उसने कनकी से पूछा लाखन की कुछ बताने को तैयार नहीं थी परंतु मैंने ने भी जिद पकड़ ली थी इसलिए कनकी को मैंने को सब बातें बता नहीं पड़ी
अगले दिन से मिलना जब चलने जाता तो पक्की भी एक किराया नीचे खींच लेता बेल की पत्तियां स्वयं का था और पके पेड़ कनकी को तोड़ तोड़ कर खाने के लिए कहता हूं कि अब वे में भी मीठे बेर खाने लगी थी उसका पेट भर जाता था हमें ना फिर से खुश रहने लगे थे कनकी आप फिर से निखर रही थी अब कनकी और मैं खुश रहते और खूब हंसते खेलते
मंकी और उसकी मां को कान की कहानी करना और उसका खुश रहना फिर से करने लगा था यह सोचने लगी थी कि हम तो इसे खाना नहीं देते फिर अब यह ऐसा क्यों खा रही है जो कि सुंदर होती जा रही है
अगले दिन मंकी की माने राज करने के लिए चुपकेसे मंकी को कनकी के पीछे लगा दिया
रोज की तरह पेड़ के नीचे पहुंच कर मैंने बेर की डाली से बेर की पत्तियां खाने लगा था और खनकी उस पर शेर पके पके पेड़ तोड़ तोड़ कर खा रही थी
मंकी यह सब देखकर तुरंत घर लौट आई उसने अपनी मां से सब बताया और कहा कि मां मीठे मीठे बेर वह खाए तो वह मोटा है कि हम मोटा है
मंकी के मानेगा तो यह बात है?
दूसरे दिन मंकी की मां ने बीमार पड़ने का नाटक कर दिया और रजाई ओढ़ कर सो गई
मंकी के पिता ने पत्नी सेव करूं स्वर में कहा अब तुम ही बताओ कि मैं ऐसा क्या करूं कि तुम ठीक हो जाओ
मंकी की मां ने कहा गांव के पिछवाड़े जुबेर का पेड़ है है अगर उसे कटवा कर उसकी जड़ पीसकर मेरे माथे पर लगाई जाए तो शायद मेरा सिर दर्द ठीक हो जाए
कनकी के पिता ने का इसमें कौन सी बड़ी बात है मैं अभी उसे कटवा देता हूं
बेर का पेड़ कट गया उसकी जड़ को पीसकर जब मंकी की मां के सिर के ऊपर उसका लेप लगाया गया तो मंकी की मां का सिर धड़ एकदम गायब हो गया
मंकी के पिता पत्नी के ठीक हो जाने प्रसन्न थे
इधर मंकी और मंकी की मां बहुत परेशान थी कि अब तो बेर का पेड़ नहीं रहा अब कनकी को भरपेट भोजन नहीं मिल पाएगा अब तो केवल मन की ही मोटी ताजी सुंदर होकर निखार पाएगी
कंकिया मिलने को चराने के लिए जंगल में जाने लगी थी अब वह फिर से भूखी रहकर सूखने लगी थी एक दिन मैं भूख के मारे जोर जोर से रोने लगी मैं बिना मैं समझ गया था कि कल की को भूख लग रही है नींद ना अब घास छोड़कर एक कार्बन के छोटे पेड़ पर चढ़ने लगा मिलना कार्बन की पत्तियां खाता और मीठे मीठे कर्म जुड़कर अपनी बहन गंदगी को देना कल भी वही कर खा लेती आवे रोज रोज ऐसा करते तो इस तरह दोनों भाई बहन फिर से खुश रहने लगे थे इधर भी होने लगी थी गांव में अब उसके स्वभाव सुंदरता की अक्सर चर्चा हुआ करती थी
इधर मां बेटे की चिंता फिर से बढ़ गई थी अच्छे-अच्छे पकवान मिठाई सब व्यर्थ चले जा रहे थे मंकी का रंग रूप दे शोभा कुछ भी ना खेल रहा था ऊपर से कूद कूद कर वे चिड़चिड़ी होती जा रही थी मंकी की तारीफ आज तक कभी किसी ने नहीं की थी
मंकी की मां शेरा ना गया उसने फिर चुपके से मंकी को कल की एबीसी भेज दिया और सब कुछ जान दिया मंकी बड़े शिकायती लहजे में ठंड की थी मां मीठे-मीठे कर 1 वह खाए तो वह मोटा है कि हम मर जाएं
अगले दिन माने फिर से चादर ओढ़ कर्नाटक पसार दिया था तेरे से मंकी की मां के सिर में भयंकर दर्द हो गया थ वह कनकी के पिता से कह रही थी जल्दी कुछ ना किया गया तो वह मर जाएगी पिंकी के पिता सब उपचार कर लेने के बाद फिर से अधीर और निराश थे तब मंकी की मां ने मंकी के पिता को सुझाया अगर इस मामले को मारकर उसका कलेजा मेरे सिर पर रखा जाए तो मेरा सिर दर्द ठीक हो सकता है इसलिए आप परेशान ना होइए और इस आखिरी उपाय को देख लीजिए नहीं तो अब तो मैं मर ही रहूंगी
मंकी के पिता ने वैसा ही किया उन्होंने मैंने को मरवा दिया मैंने को चलाते समय कनकी के बिना बहुत दुखी थे क्योंकि उनकी कनकी अक्सर इसी में उनके साथ खेला करती थी उनके पिता बहुत दुखी थे क्योंकि उनकी चंकी अक्सर इसी में उनके साथ खेला कर दी गई है परंतु मैं बिना मर चुका था बहुत रो रही थी लेकिन उसके कलेजे को अपने सिर पर आकर मंकी की मां भली चंगी हो चुकी थी
मंकी और उसकी मां बहुत खुश थी अब तो कल की को इकलौता सहारा उसका भाई मैं मना भी नहीं रहा था अब वह क्या करेगी
इतना सब कुछ करने के बाद भी मंकी की मां ने उनकी का पीछा नहीं छोड़ा था
अब वे उसे कंडा बनने के लिए धूप में दिनभर बाहर भेजती थी और अपने लिए तरह-तरह के भोजन पकवान बनाकर रख आती रहती कनकी को वह दोनों रोज-रोज भूखा रखती थी
कल की टोकरी लेकर आप बड़े तालाब के किनारे जाने लगी थी तालाब के किनारे ही सारे चरवाहे अपनी गाय भैंस लेकर चरण में आया करते थे इसलिए यहां आसानी से उसे कंडे मिल जाते थे
कनकी रोटोमेक कंडा बिनते भूख और प्यास से व्याकुल हो जाती
1 दिन कल की प्यास बुझाने के लिए तालाब में पानी पीने के लिए कोई तो वहीं बैठकर भूख के मारे रोने लगी कम की दुखी होकर आज बहुत देर तक रोती रहेगा उसे समय का कोई भी अनुमान नहीं रहा आज उसे अपने भाई की बहुत याद आ रही थी
उसी तालाब में 1 साल से ज्यादा था वह सो रहा था कल की के रोने की आवाज से उसकी नींद टूट गई थी मैं तालाब से बाहर निकल कर आया और कंघी से उसके रोने का कारण पूछने लगा पहले तो कनकी ना रुक रुक करती रही परंतु जब सारा सन छोड़ देने लगा तो कनकी ने उसे अपना सारा हाल कह सुनाया
उसने बताया कि आज उसे अपने भाई की बहुत याद आ रही थी इसलिए वह रो रही थी सब कुछ सुनकर सारस को बहुत दुख हुआ उसने कनकी से कहा तुम चिंता मत करो हाथ से मैं तुम्हारा भाई हूं अब मैं तुम्हारा ख्याल रखूंगा और तुम बिल्कुल भी भूखी नहीं रहोगी कहकर सारस तालाब में चला गया
सारा कुछ ही मिनटों में तालाब से बाहर आ गया उसकी सोच में इस समय कोई छोटी-छोटी मछलियां दबी थी उसने उन्हें कनकी को देते वह तो मैंने खा लो तुम्हारी भूख मिट जाएगी अब तुम रोज यही पर आ जाना मैं तुम्हें मछलियां मार कर दूंगा इस तरह तुम भूखी नहीं रहोगी
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