उज्जैन और ओमकारेश्वर यात्रा का संक्षिप्त सारांश
भारत देश विविधता और संस्कृति का अद्भुत संगम है, और उज्जैन और ओमकारेश्वर इस संगम का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। यह यात्रा आपको तत्वर्थों के पावन स्थलों के आदर्श और अद्वितीय प्राचीन स्थलों का अनुभव कराती है।
यात्रा का पहला अवधान उज्जैन की ओर होता है, जो मध्य प्रदेश राज्य में स्थित है। यह भगवान महाकालेश्वर के पवित्र मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ के मंदिर में महाकाल को जलाभिषेक किया जाता है, जिससे वहाँ की आत्मा को पवित्रता का अनुभव होता है। उज्जैन के चारों दिशाओं में बसे चार महाकाली मंदिर भी पूजा के यात्रीगण का आकर्षण बनते हैं।
यात्रा के दूसरे दिन, हम ओमकारेश्वर की ओर बढ़ते हैं, जो नर्मदा नदी के किनारे स्थित है। यह स्थल ज्योतिर्लिंग के रूप में जाना जाता है और नर्मदा के पावन तट पर बसा हुआ है। प्राचीन मंदिर की वास्तुकला और नदी के किनारे की शांति का अनुभव करके यहाँ की माहात्म्य का पता चलता है।
यात्रा के तीसरे दिन, हम उज्जैन के पास स्थित महाकालेश्वर वन्दना और सिद्धावट की ओर बढ़ते हैं। महाकालेश्वर वन्दना भगवान शिव के एक महत्वपूर्ण द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहाँ के मंदिर की शांति और प्राचीनता आपको आत्मा की शांति का अनुभव कराती है। सिद्धावट प्राचीन गुफाओं के साथ एक शानदार पहाड़ी पर स्थित है और यहाँ से आपको नदी के तट पर अद्वितीय दृश्यावली का आनंद मिलता है।
यात्रा के चौथे दिन, हम उज्जैन के निकट स्थित महाकाली मंदिर और गोमांस धाम की ओर बढ़ते हैं। महाकाली मंदिर देवी पार्वती के पवित्र मंदिर के रूप में जाना जाता है और यहाँ की माहात्म्य का अनुभव करने से आपकी आत्मा को शांति मिलती है। गोमांस धाम नर्मदा नदी के किनारे स्थित है और यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता आपके मन को प्रसन्न करती है।
_*विश्वास रखिए भगवान की ओर से हमारे लिए जो फैसला किया गया है वह सर्वोत्तम ही है.....*_
एक बार पुनः शिवकृपा हुई और हम ओंकारेश्वर में 7 दिवसीय शिवकथा का आनन्द ले रहे है। आज रुद्राक्ष के बारे में महाराज ने बहुत रोचक जानकारी दी।
*आप नहीं जानते होंगे रुद्राक्ष के बारे में यह बातें।*
एक रेखा वाले रुद्राक्ष को एक मुखी रुद्राक्ष कहा जाता है। यह रुद्राक्ष शिवरूप माना जाता है। एक से लेकर चौदह मुखी रुद्राक्ष भी अलग-अलग फल देते है। यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं एक मुखी से चौदह मुखी रुद्राक्ष से संबंधित अनोखी एवं रोचक बातें...👇
*1 से 14 मुखी रुद्राक्ष :*
🕉️ एक मुखी रुद्राक्ष मुक्ति देता है।
🕉️ दो मुखी शिव पार्वती रूप है, जो इच्छित फल देता है।
🕉️ तीन मुखवाला रुद्राक्ष त्रिदेवरूप है जो विद्या देता है।
🕉️ चार मुखी ब्रह्मरूप है, जो चतुर्विध फल देता है।
🕉️ पंचमुखी रुद्राक्ष पंचमुख शिवरूप है, जो सब पापों को नष्ट करता है।
🕉️ छः मुखी रुद्रज्ञक्ष स्वामिकार्तिक रूप है, जो शत्रुओं का नाश करता है, पापनाशक है।
🕉️ सात मुखी कामदेवरूप है, जो धन प्रदान करता है।
🕉️आठ मुखी रुद्राक्ष आठ दिशाओं और आठ सिद्धियों का नेतृत्व करता है। इस रुद्राक्ष को पहनने से मनुष्य को गंगा में नहाने जैसा पुण्य मिलता है।
🕉️ नौ मुखी कपिल मुनि रूप तथा नव दुर्गारूप है, जो मनुष्य को सर्वेश्वर बनाता है।
🕉️ दशमुखी विष्णु रूप है, जो कामना पूर्ति करता है।
🕉️ ग्यारह मुखी एकादश रुद्ररूप है, जो विजयी बनाता है।
🕉️ बारह मुखी द्वादश आदित्य रूप है, जो प्रकाशित करता है।
🕉️ तेरह मुखी रुद्राक्ष विश्वरूप है, जो सौभाग्य मंगल देता हैं।
🕉️ चौदह मुखी परमशि रूप है, जो धारण करने से शांति देता है।
ये एक से चौदह मुख तक के रुद्राक्ष के बारे में विशेष बातें है, अपनी क्षमतानुसार आप कोई भी रुद्राक्ष इसे धारण कर सकते हैं।
*🔰सीहोर- रुद्राक्ष 🔰*
जब हमने पुष्कर में रहकर श्री प्रदीप जी मिश्रा जी की 7 दिवसीय शिवकथा सुनी तो हमने वहाँ *सीहोर से रुद्राक्ष लाने की मनोकामना की।* श्रीमतीजी ने मन ही मन कहा कि भोलेनाथ, आप भोले भी है और दयालु भी, *मुझे एक महीने में रुद्राक्ष दिला दो तो आपका चमत्कार हो जाये।*
अचानक 15 जुलाई को भीलवाड़ा से चाचीजी का फोन आया कि *ओंकारेश्वर में 10 अगस्त से 7 दिवसीय शिवकथा हो रही है* और आप दोनों चले तो सीट बुक करा दे।
हमने तुरन्त हाँ कर दी। हम 9 जुलाई को उज्जैन पहुंचे, वहाँ से सीहोर जाकर दो रुद्राक्ष प्राप्त किये। *रुद्राक्ष पाकर हम बहुत प्रसन्न थे।* हम अंतर्मन से भोलेनाथ के चमत्कार को नमन कर रहे थे।
क्योकि हमे मनोकामना करने के एक माह के भीतर रुद्राक्ष मिल गया था। *हम सीहोर के कूबरेश्वर धाम से शिवशंकर प्रभु का दिल से धन्यवाद कर रहे थे।*
*🔰जय नर्बदा मैया🔰*
*आज भोलेनाथ की कृपा से ओंकारेश्वर में हमने प्रातःकाल में नर्बदा स्नान किया फिर ममलेश्वर ज्योतिलिंग के दर्शन किये। दर्शन पाकर अलौकिक आनन्द की प्राप्ति हुई।*
*हे भोलेनाथ, आपने जैसे हमारी मनोकामना पूर्ण की, वैसी मनोकामना इस सन्देश को पढ़ने वालों की जरूर पूरी करना।*
*🔰रुद्राक्ष गाथा🔰*
*रुद्राक्ष कैसे हासिल हुआ उसी घटनाक्रम को लेख के माध्यम से प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहा हूँ शायद आपके यह लेख सहायक सिद्ध हो जाये।👇*
कथावाचक श्री प्रदीप जी मिश्रा की शिवपुराण कथा का आयोजन पुष्कर में 5 जुलाई से 11 जुलाई के मध्य हुआ जिसका हमने 7 दिवसीय भरपूर आनन्द लिया। हमे उसी दौरान यह जानकारी हुई कि सीहोर में प्रदीप जी मिश्रा के कूबरेश्वर धाम पर निःशुल्ज रुद्राक्ष वितरित होते है।
हमारी भी इच्छा हुई कि वह चमत्कारी रुद्राक्ष को हासिल करें। आखिरकार भोलेनाथ की कृपा हुई और हमारा 10 अगस्त से 16 अगस्त तक ओंकारेश्वर में शिवकथा सुनने का सौभाग्य प्राप्त हो गया। हम 8 तारीख को रात्रि 8.20 पर भोपाल एक्सप्रेस में बैठ गए।
हम प्रातः लगभग 7 बजे उज्जैन नगरी उतर गए। वहां से हमने सीधे ऑटो करके एक होटल में कमरा बुक किया और स्नान आदि से निवृत होकर तुरन्त सीहोर के लिए निकल गए। हमने 11 बजे वाली ट्रेन पकड़ी और दिन में 2.20 पर सीहोर रेलवे स्टेशन पहुंचे।
वहां से हमने ऑटो किया। हम 7 परिजन साथ मे थे। प्रति सवारी 30 रुपये के हिसाब से ऑटो किराया तय हुआ। हम सीहोर में सीवन नदी को मार्ग से देखते हुए लहभग 7 किमी की दूरी तक गए तो प्रदीप जी मिश्रा का कूबरेश्वर धाम नजर आया।
हम सड़क को पार करते हुए धाम की ओर बढ़ रहे थे। उस रोड से लगभग 500 मीटर की दूरी पर कूबरेश्वर धाम स्थित था। जैसे हमारे कदम धाम की ओर बढ़ रहे थे, वैसे हमारा दिल प्रफुल्लित नजर आ रहा था क्योकि आज हमारी दिल की मुराद पूरी होने वाली थी।
अब हम मुख्य गेट के सामने आ गए। मैं उत्सुकता से चल रहा था और मुख्य गेट में घुस गया। लगभग 100 मीटर अंदर जाने के बाद श्रीमती जी दौड़ी हुई आई और कहा कि पहले हमें रुद्राक्ष लेना है और अगले रास्ते से जाना होगा इसलिए वापस बाहर चलो।
हम तुरन्त बाहर आये और 200 मीटर आगे बढ़ने पर हमें कुछ भीड़ नजर आई। बहुत से लोग लाइन में लगे थे जो रुद्राक्ष को पाने के लिए लालायित थे। हम भी उसी लाइन में रुद्राक्ष की मनोकामना लेकर खड़े हो गए। हमने सुना था कि 4-5 घण्टे लाइन में लगने पर रुद्राक्ष हासिल होता है।
*लेकिन यहां भी शिवजी की कृपा देखिए* हम लाइन में बढ़ते चले गए। शाम का समय था और 5 बजे तक ही रुद्राक्ष बटते है इसीलिए हमें मात्र 15 मिनट में रुद्राक्ष प्राप्त हो गए। रुद्राक्ष पाकर हमे बहुत खुशी हो रही थी। हम अंतर्मन से भोले का गुणगान कर रहे थे।
कोई भी भक्त रुद्राक्ष दोबारा न ले इसके लिए भी धाम पर माकूल व्यवस्था की गई है। जिस प्रकार चुनाव में वोट डालने से पहले अमिट स्याही लगाते है ठीक उसी प्रकार रुद्राक्ष लेने से पहले हर भक्त के वह अमिट स्याही लगाई जाती है।
जब भक्त रुद्राक्ष केबिन के समीप पहुंचता है तो केबिन में बैठी रुद्राक्ष वितरक महिला केबिन विंडो से एक रुद्राक्ष छोड़ती है जो लुढ़कता हुआ भक्त तक पहुंचता है और भक्त उस रुद्राक्ष को ले प्रश्नता बाहर निकल जाता है।
कहते है कि रुद्राक्ष को जल में डालकर पुनः रुद्राक्ष को बाहर निकाले और वह जल पी ले तो शरीर की समस्त व्याधियां समाप्त हो जाती है। जो रुद्राक्ष मुझे मिला उसका आकार कुछ बड़ा था जबकि श्रीमती जी को छोटे आकार का रुद्राक्ष मिला। मैने श्रीमती जी से यह कहकर चुटकी ली कि यहां भी शरीर के आकार के हिसाब से रुद्राक्ष मिले है।😆
हमने वहां कूबरेश्वर धाम परिसर में बने विशाल शिवलिंग की पूजा अर्चना की। विष्णुभगवान की चित्रकारी को निहारते हुए कुछ फोटो कैमरे में कैद की। वहां बन रही निर्माणाधीन विशाल शिवलिंग प्रतिमा को देखा। अब शाम के 6 बज रहे थे और हमने तुरन्त ऑटो किया और 6.50 बजे वाली ट्रेन से पुनः उज्जैन आ गए।
*🔰जय ओंकारेश्वर🔰*
*आज भोलेनाथ की कृपा से ओंकारेश्वर में हमने प्रातःकाल बेला में ओंकारेश्वर मन्दिर की 7 किमी की परिक्रमा के साथ ही संगम स्नान करके ऋण मुक्तेश्वर महादेव के दर्शन किये। दर्शन पाकर अलौकिक आनन्द की प्राप्ति हुई।*
*हे भोलेनाथ, जिस प्रकार आपने हमारी मनोकामना पूर्ण की, वैसी ही मनोकामना सभी भक्तों की अवश्य पूरी करना।*
*🌹जय भोलेनाथ की🌹*
ओंकारेश्वर धाम
ओंकारेश्वर शिवकथा
*🌹जय श्री कृष्णा🌹*
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