When he started treating him like a Omega

शिन्यू और डूहून के लिए हंजिन अब सिर्फ एक टीममेट नहीं रहा था। उनकी नजरों में वो पूरी तरह से ओमेगा बन चुका था — उसकी चाल, उसकी नर्मी, उसका शांत रहना, उसका अकेले बैठना… हर चीज़ अब उन्हें ओमेगा जैसे सिग्नल्स लगने लगी थी।

जब हंजिन ने स्टेज से उतरकर अपना चेहरा पोंछते हुए थका हुआ "आह" कहा, तब शिन्यू का दिमाग सीधे अल्फा मोड में चला गया — वो थक गया है, उसे सपोर्ट चाहिए…

जब डूहून ने देखा कि हंजिन अपने बॉटल से पानी पीने के बाद होंठों पर जीभ फेर रहा है, उसका दिल ज़ोर से धड़क उठा — ये साइन है… शायद हीट का असर है…

लेकिन…

हंजिन के लिए ये सब कुछ भी नहीं था।

वो तो बस प्यासा था, थका हुआ था, और थोड़ा शांत स्वभाव का था। उसे न शिन्यू की गहराती नज़रों की फिक्र थी, न डूहून के हर वक्त उसके करीब आने की।

जब शिन्यू ने उससे कहा, “तुम आज बहुत… अलग लग रहे हो,”
हंजिन ने हँसकर जवाब दिया, “क्या मतलब? पसीने-पसीने हूँ बस, कुछ अलग नहीं।”

डूहून ने जब उसकी जैकेट उसे खुद पहनाने की कोशिश की, हंजिन ने कहा, “अरे भाई, मैं बच्चा नहीं हूँ… खुद कर लूंगा।”

शिन्यू और डूहून दोनों को ये समझ नहीं आ रहा था कि वो जिसे ओमेगा समझ बैठे हैं, वो खुद को वैसा मानता ही नहीं।

वो खुद को कोई खास नहीं समझता, कोई नाज़ुक नहीं, और न ही किसी के प्रोटेक्टिव बिहेवियर को ज़रूरतमंद।
और यही सबसे बड़ा कन्फ़्यूज़न बन गया।

शिन्यू रात में डांस प्रैक्टिस के बाद भी उसे देखता रहा — क्यों मुझे उसे देखकर ये सब महसूस हो रहा है… जबकि उसे कोई फर्क नहीं पड़ रहा?

डूहून ने अपने नोटबुक पर लिखा: क्या मैं ही बदल गया हूँ? क्या ये मेरी सोच है जो उसे वैसा बना रही है जैसा वो असल में है ही नहीं?

उधर, हंजिन ने खुद से कहा — इन दोनों को क्या हो गया है? ये ऐसे क्यों घूरते हैं मुझे… अजीब हो रहे हैं ये लोग…


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हकीकत और भ्रम के बीच की दीवार अब एकदम पतली हो गई थी।

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