What is the Best Age For Invest: किस उम्र में कितनी सेविंग? 35 साल के बाद बदल जाता है फॉर्मूला, ये है गणित... 

What is the best age for investment?: सच है कि आप निवेश की शुरुआत कभी भी कर सकते हैं. लेकिन उम्र के हिसाब निवेश (Invest) की राशि, रिस्क (Risk), और पोर्टफोलियो (Portfolio) का आकार बदल जाता है.

 

आज की तारीख में कोई 40 की उम्र में रिटायर (Retired) होना चाहता है तो कोई 50 में, कोई 60 की उम्र तक नौकरी का ख्याल मन में लेकर चलता है. लेकिन इन सबके बीच अधिकतर लोगों ऐसे होते हैं, जो रिटायरमेंट को लेकर समय रहते गंभीर नहीं होते हैं, और फिर बाद में पछताते हैं. रिटायरमेंट ही नहीं, अपने फ्यूचर प्लान को लेकर ऐसे लोग लापरवाह होते हैं. अच्छी कमाई के बावजूद एक रुपये नहीं बचा पाते हैं. क्योंकि वे सेविंग को गंभीरता से नहीं लेते हैं ।

 

आइए आज हम आपको बताते हैं, किस उम्र में निवेश की शुरुआत (How to Investment) कर देना चाहिए. हालांकि ये सच है कि आप निवेश की शुरुआत कभी कर सकते हैं. लेकिन उम्र के हिसाब निवेश (Invest) की राशि, रिस्क (Risk), और पोर्टफोलियो (Portfolio) का आकार बदल जाता है. अक्सर लोग 25 की उम्र से जॉब शुरू कर देते हैं, कुछ लोग 30 तक शुरुआत करते हैं।

 

लेकिन क्या पहली नौकरी के साथ निवेश का पहला कदम बढ़ा देना चाहिए? किस उम्र में कितना निवेश करना चाहिए? क्या पारिवारिक बोझ आने के बाद ही निवेश शुरू करना चाहिए? वित्तीय जानकारों का कहना होता है कि प्राइवेट जॉब (Private Job) वालों को पहली नौकरी से निवेश के बारे में सोचना चाहिए. इसके दो फायदे हैं, पहला- कम उम्र में मोटी रकम जुटा लेंगे और दूसरा- जब कम उम्र से निवेश की शुरुआत करेंगे, तो निवेश के लिए वक्त ज्यादा मिल जाएगा, जिससे कम निवेश से भी बड़ा फंड बन जाएगा ।

 

सही उम्र में निवेश बेहद जरूरी

 

उम्र 25 से 35 साल वालों के लिए ये फॉर्मूला

इस उम्र में लोग जिंदादिल होते हैं. कम कमाते हैं... लेकिन बेफिक्र होकर खर्च करते हैं. यह जिंदगी का लुत्फ उठाने वाली उम्र है. इसलिए अधिकतर लोग इस उम्र में पैसे बचा नहीं पाते. जब बचा नहीं पाते हैं तो फिर सेविंग का सवाल ही नहीं उठता. लेकिन अगर इस उम्र से निवेश शुरू कर दें, तो फिर किसी भी वित्तीय लक्ष्य को आसानी से हासिल कर सकते हैं ।

 

उदाहरण के तौर पर 25 साल का युवा हर महीने केवल 2000 रुपये का SIP करता है, और यह सिलसिला 60 की उम्र तक जारी रहता है तो फिर उसके पास 1 करोड़ 35 लाख रुपये जमा हो जाएंगे. यह आकलन 12 फीसदी ब्याज पर आधारित है. जबकि इससे भी ज्यादा पैसे बनाए जा सकते हैं ।

 

इसलिए 25 से 35 साल की उम्र वालों के लिए रिटायरमेंट पर 2 करोड़ रुपये पाने के लिए रास्ता बेहद आसान होता है. 35 साल वाले को हर महीने केवल 10 हजार के निवेश पर 2 करोड़ रुपये मिल सकता है. जबकि 25 साल वाले तो केवल 3 हजार महीने की SIP पर 60 साल के बाद 2 करोड़ रुपये जुटा लेंगे. कल्पना कीजिए अगर कोई 25 साल की उम्र से ही हर महीने 10 हजार रुपये की SIP शुरू कर दे तो 60 की उम्र में करीब 5 करोड़ रुपये जुटा लेंगे. क्योंकि 25 साल के युवा को 35 साल तक निवेश का मौका मिल जाएगा, चक्रवृद्धि ब्याज की वजह से 35 साल में बड़ा फंड हासिल हो जाएगा ।

 

35 से 50 वर्ष के लोगों के लिए ये नियम ।

35 वर्ष की उम्र तक अधिकतर लोग सेटल हो चुके होते हैं. इस उम्र में लोग अपने लक्ष्य (Target) को गंभीर हो जाते हैं. घर, गाड़ी, रिटायरमेंट, बच्चों की पढ़ाई और उसकी शादी जैसी जिम्मेदारियां आ जाती हैं. ऐसे में उन्हें कम समय में ज्यादा पैसा चाहिए होता है. अगर किसी की उम्र 40 साल है तो फिर उसे अगले 20 साल में इतने पैसे चाहिए कि हर जरूरतें पूरी हो सके. ऐसे में एक ही रास्ता है मोटा निवेश. केवल 5-10 हजार रुपये महीने निवेश कर सभी गोल हासिल नहीं हो सकते. साथ ही इस उम्र में रिस्क लेने की क्षमता भी कम हो जाती है ।

अगर कोई 40 साल की उम्र से SIP शुरू करता है फिर 60 साल की उम्र में 2 करोड़ रुपये पाने के लिए उन्हें हर महीने कम से कम 20 हजार रुपये की SIP करनी होगी. 45 साल वाले को हर महीने 40 हजार रुपये जमा करने होंगे, जो इस उम्र में थोड़ा मुश्किल हो जाता है. वहीं अगर कोई 10 साल में कोई 2 करोड़ रुपये जुटाना चाहता है तो उसके लिए उसे हर माह 90 हजार की SIP करनी होगी, जो कि हर किसी के लिए संभव नहीं है. यह आंकलन 12 फीसदी ब्याज पर आधारित है. इसलिए निवेश के लिए सही उम्र 25 से 35 साल ही है. इस उम्र में बिना बोझ छोटी राशि जमा कर आप रिटायरमेंट पर मोटी फंड जुटा सकते हैं ।

 

निवेश के लिए केवल SIP को ही नहीं चुनें. सारा पैसा कहीं एक स्थान पर लगाने की बजाए कई अलग-अलग स्थानों पर लगाएं. पोर्टफोलियो डाइवर्सिफाइड करके जोखिम को घटा सकते हैं. कुछ लोग आज के दौर में सीधे इक्विटी मार्केट (Equity Market) में पैसे लगाते हैं, जिसमें रिटर्न की उम्मीद ज्यादा होती है. लेकिन यहां जोखिम भी अधिक रहता है.

 

 

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