how to improve speaking or verbal communication

      • वाणी अर्थात बोलने की शक्ति, ईश्वरीय उपहार है. वाणी या बोलने की शक्ति असीम हैं. इसलिए किस्से, क्या कैसे, कब और कहां बोलना है,बहुत महत्वपूर्ण हैं. मौखिकः संप्रेसन में श्रवण अथवा सुनने की कला भी शामिलहैं. यहाँ पर बोलने या संप्रेषण कला के महत्वपूर्ण,तीन पक्षों पर प्रकाश डाला जा रहा है:

 

    • सामान्य बोलचाल
    • प्रभावी व्याख्यान
    • शाब्दिक संचार या बॉडी लैंग्वेज

सामान्य बोलचाल

सामान्य बोल चाल में निम्न बातों का धयान रखना चाहिए

  • सहमति या विरोद की बातें धैर्यपूर्वक सुनना
  • दूसरों को प्रिय या रुचिकर बोलना
  • संदेहों, शंकाओं का निवारण करना
  • संदेहों, शंकाओं का निवारण करना
  • सुनने की कहा विकसित करना
  • निर्णय लेने की जल्दबाजी नहीं करना
  • स्वर का टोन बनाए रखना
  • बोलने के साथ शारीर की भाव भगिमान का धयान रखना

प्रभावशाली  तरीके से बोलने के उपाय

जब हम अन्य लोगों के सामने अपना विचार रखते हैं तो  हमारी यह जानने की इच्छा होती हैं की हमारे बोलने का सामने वाले व्यक्ति पर क्या प्रभाव पड़ा यदि हमें उनसे समर्थन मिलता हैं तो हम मान सकते हैं कि हमारी ोलना या भाषण उनको सही या अच्छा लगा प्रभावशाली तरीके से बोलना व्याख्यान अथवा भाषण करना के कला हैं हर कोई बोल सकता है किन्तु क्या, कैसे, कब और कहां बोलना है के लिए अनुभव एवं कुशलता की आवश्यकता होती है एक कहे और दूसरा समझे, तभी बोलना फलदायक हो सकता है

प्रभावपूर्ण बोन या व्याख्यान के मुख्य तीन आधार है

  • वक्त के विचार, जिन्हे श्रोता सुनना पसंद करें,
  • वक्ता द्रारा विचारों का सही प्रस्तुतीकरण , तथ
  • व्याख्यान अथवा व्यक्त्व पर श्रोतावन की स्वीकृति मिलना . शामे वक्ता के विचारों का धैर्यपूर्वक सुनना या उन पर मनन या अमल करना भी शामिल है

प्रभावशाली बोलना या सफल मौखिक सम्प्रेषण के लिए निम्न बातों पर धयान देना चाहिए

1.भयमुक्त होकर बोलना

किसी भी बैठक, संगोठि या सभा में बोल्ये समय, वक्ता को हाय नहीं रखना चाहिए. किन्तु भयमुक्त होकर बोलने के लिए पूर्व तयारी के तौर पर निम्न बिन्दुओं सहायता ली जा सकती है :

  • व्याख्यान या बोलने के विषय पर अपनी जानकारी पूरी रखे
  • अपनी इच्छा शक्ति विकास करे
  • बोल्ये वक़्त अपने निजी अनुभवों को व्यक्त करे
  • श्रोताओं की मानसिकता, शंकया का धयान रखे
  • श्रोता या श्रोताओं से आँख संपर्क बनाये रखे
  • वाणी दमदार हो किन्तु सहज रहे, ावशयकतानुसार बोलने में लचीलापन रखें

2. विशवनीयता बनाये रखें 

यह देख गया हैं कि श्रोता/श्रोताओं का सहयोग,बोलने वाले की विशवनीयता पर निर्भर करता है यदि वक्ता पूर्व परिचित, प्रतिष्ठित, चरित्रवान तथा हिट कार्य करने वाला हो तोह उसे श्रोता अधिक पसंद करते हैं, वक्ता को विष्वसनीयता हेतु निम्न तथ्यों पर गौर करना चाहिए

  • बोलने की भाषा का पूर्ण ज्ञान होना
  • विषय पर बोलने की योग्यता हासिल करना
  • श्रोताओं के हितार्थ बोलना
  • विचारों का तर्क संगत होना
  •  श्रोताओं तथा विषय / टॉपिक के प्रति ईमानदारी रखना (झूठी बातें असत्य भाष
  • अनर्गत बातें करने से बचें)
  • बोलने के बीच असहायता अथवा नर्वसनेस (Nervousness) प्रकट नहीं 

3. आंकड़ों का सही प्रयोग करना

बोलते समय अपने कथन की प्रमाणिकता एवं सत्यता हेतु आंकड़ों का प्रयोग का सकते हैं किन्तु आंकड़े सही हों, उनका सीमित उपयोग किया जाए. ध्यान रखे आंकड़ों के कारण बोलना (भाषण) बोझिल नहीं हो जाए.

4. चित्रात्मक शैली में बोलना

श्रोताओं का ध्यान आकर्षित करने के लिए अपने भावों, विचारों एवं घटनाओं का सुन्दर चित्र प्रस्तुत करना चाहिए. यह ध्यान में रखें कि श्रोता सामान्य वर्णन नहीं बल्कि कुछ विशेष चाहता है. श्रोताओं को अपने विचारों के साथ बहा ले जाने हेतु घटनाओं, अनुभवों का कलात्मक विवरण देना चाहिए. संस्मरणों का प्रयोग भी वक्ता की शैली में निखार लाता है.

5. कल्पना शक्ति का सहारा लेना

बोलते समय कल्पना शक्ति तथा उसके साथ कुछ साक्ष्य या प्रमाण (सपोर्ट) प्रस्तुत करके, वक्तव्य या भाषण को प्रभावी बनाया जाता है.

6. उक्तियों/कहावतों / मुहावरों का प्रयोग करना

बोलते समय विषय से सम्बंधित विशेषज्ञों या महान पुरुषों की उक्तियों पा कथन क प्रयोग कर, व्याख्यान को महत्वपूर्ण बनाया जा सकता है. इसी प्रकार कहावतों / मुहावरों का उपयोग भी बोलने में आकर्षण उत्पन्न करता है.

 

7. श्रोताओं का समर्थन प्राप्त करना

जैसा कि प्रारंभ में चर्चा कर चुके हैं कि बोलना कोई भी प्रारम्भ कर सकता है किन्त श्रोताओं का समर्थन कुछ ही वक्ता प्राप्त कर पाते हैं. इसे प्राप्त करने हेतु पहले ऐसी बाले की चर्चा की जानी चाहिए जिनसे श्रोता सहमत हों, फिर विरोधी विचार या असहमति के बिन्दुओं पर बोलना चाहिए तथा तर्क एवं प्रमाणिकता के साथ श्रोताओं का समर्थन प्राप्त करने हेतु कोशिश करनी चाहिए.

 

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