जय श्रीराम
मित्रों :-
बुरी नजर वाली काली कांग्रेस का कलंक
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कर्नाटक में कांग्रेसी हिजाब का कुचक्र
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ज्यादा समय नहीं बीता।
अभी कोई पंद्रह बीस साल पहले तक
हिजाब न तो जन्नत जाने की गारंटी था ।
और
इस्लाम की निशानी।
भारत में शायद ही कोई मुस्लिम लड़की हो ।
जिसने हिजाब शब्द भी सुना हो।
यह स्थिति केवल भारत में ही हो, ऐसा नहीं है।
इस्लाम के नाम पर बने पाकिस्तान में
लगभग दो दशक पहले तक
कोई मुस्लिम लड़की हिजाब नहीं पहनती थी।
लेकिन इधर पंद्रह बीस सालों में
अचानक से
#हिजाब_हक_अधिकार_इस्लाम_की_पहचान,
टकराव का मुद्दा और जन्नत जाने की गारंटी बन गया।
तो फिर कहां से आया ये हिजाब?
हिजाब ईरान की इस्लामिक क्रांति से पैदा हुआ।
1979 में अयतोल्ला खोमैनी ने
जिस इस्लामिक क्रांति का आगाज किया
उसमें उन्होंने महिलाओं को सिर ढंकना
अनिवार्य कर दिया।
खोमैनी से पहले शाह शासनकाल में
ईरान की महिलाओं को कपड़े पहनने की
वैसी ही आजादी थी जैसी संसार के
किसी अन्य देश में किसी गैर मुस्लिम महिला को थी।
महिलाओं के कपड़ों को
लेकर कोई इस्लामिक बहस नहीं होती थी।
लेकिन अयतोल्ला खोमैनी ने औरतों को
सार्वजनिक जगहों पर सिर ढंकना अनिवार्य कर दिया,
और
इसके लिए
जो शब्द इस्तेमाल किया वह था हिजाब।
हिजाब शब्द कुरान में कई बार आता है ।
जिसका अनुवाद किया गया पर्दा करना।
हालांकि कुरान के जानकार ये कहते हैं।
कि
यह पर्दा कुरान में अल्लाह का बंदों से किया गया है
जिसका अर्थ होता है ।
कि अल्लाह अदृश्य है। वह पर्दे में है।
लेकिन इसी पर्दे को
खोमैनी ने महिलाओं पर लाद दिया।
धीरे धीरे ईरान से निकलकर हिजाब वाली
ये पाबंदी पूरब के देशों में भी फैली
जिसमें सबसे आगे इंडोनेशिया था।
असल में मुस्लिम देशों में ।
जहां महिलाएं बुर्का पहनना लगभग बंद कर चुकी थीं।
वहां मौलवियों द्वारा हिजाब को
एक विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया गया।
नब्बे के दशक के अंत से
यह हिजाब वाला चलन
भारतीय उपमहाद्वीप में भी आ गया
और
इसे उन लड़कियों पर थोपा गया ।
जो अब तक बुर्के वाली पाबंदी से मुक्त थीं।
आज तो मुसलमानों में हालात ये है ।
दो चार साल की बच्चियों को भी
हिजाब पहनाया जाने लगा है।
हिजाब को इस्लामिक ड्रेस कोड के रूप में
न केवल भारत पाकिस्तान में
बल्कि
पूरी दुनिया में स्थापित कर दिया गया है।
मैं दावे से कह सकता हूं।
कि
अगले पांच से दस साल में ये ड्रेस कोड जैसे
आया वैसे ही गायब भी हो जाएगा।
इसका कारण गैर मुस्लिमों का विरोध नहीं
बल्कि
स्वयं इस्लाम के भीतर का विरोध है।
जिस ईरान से हिजाब शुरु हुआ ।
उस ईरान में मुस्लिम लड़कियों द्वारा
इसका भीषण विरोध कई साल से चल रहा है।
इसलिए इस बात की पूरी संभावना है
कि
ईरान सरकार कुछ समय में ही
"हिजाब की अनिवार्यता"
को ही समाप्त कर देगा।
इसका एक कारण सऊदी अरब में
मुस्लिम महिलाओं को मिलने वाली आजादी भी है।
ईरान भला कब चाहेगा,
कि
वह सउदियों से पिछड़ा दिखे?
अब क्योंकि
भारत के मुल्ला मौलवी अपनी समझ के लिए ,
पूरी तरह से सऊदी अरब और ईरान पर निर्भर रहते हैं।
इसलिए
जैसे ही वहां हिजाब जाएगा,
यहां भी जन्नत की गारंटी नहीं रह जाएगा।
तब शायद बुर्के में पूरी तरह से बंद करना ।
जन्नत जाने की गारंटी हो जाएगा ।
जो कि एक बार फिर इस्लामिक ड्रेस कोड नहीं
बल्कि
अरब के एक खास कबीले का ड्रेस कोड है।
#भैया_जी_रंगीले ( संघी )
वरिष्ठ संघ विचारक
व
सनातन धर्म प्रचारक
#राजनीति_को_स्कूल_से_दूर_रखिए..
कृपया
#इसे_राजनीति_से_दूर_ही_रहने_दे।।
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