सिख धर्म के लिए श्री पौंटा साहिब गुरुद्वारे का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इसका खास कारण यह है कि यहां पर गुरु गोविंद सिंह ने 4 साल व्यतीत किये थे। साथ ही इस गुरुद्वारे की स्थापना की। मान्यता है कि यहां मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। उन्होंने दशम ग्रंथ की स्थापना भी यहीं की थी। दशम ग्रंथ के अलावा गुरु गोविंद सिंह जी ने जाप साहिब, अकाल उस्तत, चंडी दी वार, जफरनामा, शब्द हजारे, बचित्र नाटक सहित अन्य रचनाएं कीं। बता दें कि उन्होंने मानवजाति की सेवा के लिए साहित्य का प्रयोग किया। उनकी रचनाओं में यह साफ झलकता है। उनकी रचनाओं से लोगों को कठिन से कठिन समय का सामना करने की सीख मिलती है।यमुना नदी से किया अनुरोध
गुरु गोविंद सिंह ने श्री पौंटा साहिब गुरुद्वारे के समीप दशम ग्रंथ की रचना यमुना नदी के किनारे की थी। कहा जाता है कि उस समय नदी अत्यधिक शोर करती थी। तब गुरु गोविंद सिंह जी ने यमुना नदी से धीरे बहने का अनुरोध किया। बताया जाता है कि तबसे श्री पौंटा साहिब गुरुद्वारे के समीप से बहने वाली यमुना नदी बिल्कुल शांत हो गई और आज भी शांति से ही बहती है।संगीत वाद्ययंत्र का अविष्कार
गोविंद सिंह जी का कला-साहित्य के प्रति अगाध प्रेम था। उन्होंने ही संगीत वाद्ययंत्र दिलरुबा का अविष्कार किया था। इसका इस्तेमाल कई संगीतकारों ने भी किया है। बताया जाता है कि गुरु गोविंद सिंह जी के दरबार में तकरीबन 52 कवि थे।संगीत वाद्ययंत्र का अविष्कार
गोविंद सिंह जी का कला-साहित्य के प्रति अगाध प्रेम था। उन्होंने ही संगीत वाद्ययंत्र दिलरुबा का अविष्कार किया था। इसका इस्तेमाल कई संगीतकारों ने भी किया है। बताया जाता है कि गुरु गोविंद सिंह जी के दरबार में तकरीबन 52 कवि थे।संगीत वाद्ययंत्र का अविष्कार
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गोविंद सिंह जी का कला-साहित्य के प्रति अगाध प्रेम था। उन्होंने ही संगीत वाद्ययंत्र दिलरुबा का अविष्कार किया था। इसका इस्तेमाल कई संगीतकारों ने भी किया है। बताया जाता है कि गुरु गोविंद सिंह जी के दरबार में तकरीबन 52 कवि थे।संगीत वाद्ययंत्र का अविष्कार
गोविंद सिंह जी का कला-साहित्य के प्रति अगाध प्रेम था। उन्होंने ही संगीत वाद्ययंत्र दिलरुबा का अविष्कार किया था। इसका इस्तेमाल कई संगीतकारों ने भी किया है। बताया जाता है कि गुरु गोविंद सिंह जी के दरबार में तकरीबन 52 कवि थे। तो कोरियर था एज इस्लाम को मानने को वही तो जीवन को मानने को वही है तो फिर ये क्या कर रही हैं इस तरह हम लोग अंदर ही डाल दें ताकि आप तो फिर संगीत वाद्ययंत्र का अविष्कार
गोविंद सिंह जी का कला-साहित्य के प्रति अगाध प्रेम था। उन्होंने ही संगीत वाद्ययंत्र दिलरुबा का अविष्कार किया था। इसका इस्तेमाल कई संगीतकारों ने भी किया है। बताया जाता है कि गुरु गोविंद सिंह जी के दरबार में तकरीबन 52 कवि थे।संगीत वाद्ययंत्र का अविष्कार
गोविंद सिंह जी का कला-साहित्य के प्रति अगाध प्रेम था। उन्होंने ही संगीत वाद्ययंत्र दिलरुबा का अविष्कार किया था। इसका इस्तेमाल कई संगीतकारों ने भी किया है। बताया जाता है कि गुरु गोविंद सिंह जी के दरबार में तकरीबन 52 कवि थे।संगीत वाद्ययंत्र का अविष्कार
गोविंद सिंह जी का कला-साहित्य के प्रति अगाध प्रेम था। उन्होंने ही संगीत वाद्ययंत्र दिलरुबा का अविष्कार किया था। इसका इस्तेमाल कई संगीतकारों ने भी किया है। बताया जाता है कि गुरु गोविंद सिंह जी के दरबार में तकरीबन 52 कवि थे।
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