नारी का सबसे पवित्र रूप मां के रूप में देखने में आता है। माता यानी जननी। मां को ईश्वर से भी बढ़कर माना गया है, क्योंकि ईश्वर की जन्मदात्री भी नारी ही रही है। मां देवकी (कृष्ण) तथा मां पार्वती (गणपति/ कार्तिकेय) के संदर्भ में हम देख सकते हैं इसे।
किंतु बदलते समय के हिसाब से संतानों ने अपनी मां को महत्व देना कम कर दिया है। यह चिंताजनक पहलू है। सब धन-लिप्सा व अपने स्वार्थ में डूबते जा रहे हैं। (सिर्फ) मेरी बीवी व मेरे बच्चे यही आजकल परिवार की परिभाषा रह गई है। फिर बुजुर्ग माता-पिता की सेवा कौन करे? यह सवाल आजकल यक्षप्रश्न की तरह चहुंओर पांव पसारता जा रहा है। नई पीढ़ी को आत्मावलोकन करना चाहिए।
बाजी मार रही हैं लड़कियां
अगर आजकल की लड़कियों पर नजर डालें तो हम पाते हैं कि ये लड़कियां आजकल बहुत बाजी मार रही हैं। इन्हें हर क्षेत्र में हम आगे बढ़ते हुए देखते हैं। विभिन्न परीक्षाओं की मेरिट लिस्ट में लड़कियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। किसी समय इन्हें कमजोर समझा जाता था, किंतु इन्होंने अपनी मेहनत और मेधा शक्ति के बल पर हर क्षेत्र में प्रवीणता अर्जित कर ली है। इनकी इस प्रतिभा का सम्मान किया जाना चाहिए।
शीक्षा महिलाओं को अपने काम में अधिक उत्पादकता देने में मदद करती है। एक शिक्षित महिला में कौशल, सूचना, प्रतिभा और आत्मविश्वास होता है जो उसे एक बेहतर मां, कर्मचारी और देश का निवासी बनाती है। महिलाएं हमारे देश की आबादी का लगभग आधा हिस्सा हैं। पुरुष और महिलाएं सिक्के के दो पहलूओं की तरह हैं और उन्हें देश के विकास में योगदान करने के समान अवसर की आवश्यकता होती है। दोनों एक दूसरे के बिना जीवित नहीं रह सकते। हमने आपकी परीक्षा में इस विषय के साथ आपकी सहायता करने के लिए लड़कियों की शिक्षा पर अलग-अलग लंबाई के निबंध उपलब्ध करवाएं हैं। आप अपनी आवश्यकता के अनुसार इनमें से किसी भी लड़कियों की शिक्षा पर निबंध का चयन कर सकते हैं:
रत में लड़कियों की शिक्षा देश की वृद्धि के लिए काफी हद तक आवश्यक है क्योंकि लड़कियां लड़कों की तुलना में बेहतर काम कर सकती हैं। आजकल लड़कियों की शिक्षा जरूरी है और यह अनिवार्य भी है क्योंकि महिलाएं देश का भविष्य हैं। भारत को सामाजिक और आर्थिक रूप से विकसित करने के लिए लड़कियों की शिक्षा आवश्यक है। शिक्षित महिलाओं ने पेशेवर क्षेत्रों जैसे चिकित्सा, रक्षा सेवाओं, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अपने योगदान से भारतीय समाज पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। महिलाएं व्यवसाय अच्छे तरीके से करती हैं और अपने घर और कार्यालय को संभालना अच्छी तरह से जानती हैं। बेहतर अर्थव्यवस्था और बेहतर समाज लड़कियों की शिक्षा का ही नतीजा है। शिक्षित महिलाएं अशिक्षित महिलाओं की तुलना में सही समय पर या बाद में शादी करके देश की आबादी को नियंत्रित करने में मदद कर सकती हैं।
महिलाएं प्रेरणा का स्त्रोत हैं। हम समाज और देश के लिए उनके योगदान को कभी भी नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते।
लड़का दलड़की एक समान यह बात बिल्कुल सत्य है आज महिलाएं भी वो सब कार्य कर रही हैं जो पुरुष कर सकते हैं आज महिलाएं घरेलू काम काज तक ही सीमित नहीं है आज वह हर कार्य करने में सक्षम हैं फिर चाहे वो डॉक्टर हो , इंजिनियर , वकील, अध्यापक पायलट आदि में अपना नाम चमका रही हैं।
किन्तु आज भी हमारे समाज में ऐसे क्षेत्र हैं यहां लडकियों के साथ बुरा व्यवहार किया जाता है उन्हें कमज़ोर समझकर उन्हें सिर्फ घरेलू कामों तक ही सीमित रखा जाता है उन्हें पढ़ने का मौका तक नहीं दिया जाता है। चिंता की बात है के ऐसे क्षेत्रों में आज भी सरकार के सख्त कानूनों के बावजूद भी लिंग परीक्षण का धंधा खुलेआम चल रहा है।
आज हमें यह समझने की सख्त जरूरत है के महिलाएं भी पुरुषों से कम नहीं है इसीलिए आज महिलायों को कमज़ोर न मानकर उन्हें किसी भी तरह के अधिकारों से वंचित नहीं रखना चाहिए क्योंकि नारी की प्रगति में ही देश और पूरे समाज की प्रगति है इसीलिए यह कहना गलत नहीं होगा के लड़का लड़की एक समान
अंत में हम यही कहना ठीक रहेगा कि हम हर महिला का सम्मान करें, क्योंकि दुनिया की आधी आबादी के बलबूते पर ही आदमी यहां तक आया है। उसे ठुकराना नहीं चाहिए।
जिस सीढ़ी (महिला) के बलबूते पर आदमी यहां तक आया, उसका तिरस्कार, अपमान कतई उचित नहीं कहा जा सकता है। भारतीय संस्कृति में महिलाओं को देवी, दुर्गा व लक्ष्मी आदि का यथोचित सम्मान दिया गया है अत: उसे उचित सम्मान दिया जाना चाहिए।
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