What ? It's so hard to express!

 क्या  इतना मुश्किल हैं  इजहार करना 

हमारी मुलाक़ात फेसबुक पर हुई मैंने रिक्वेस्ट भेजी उसने एक्सेप्ट की डीपी इतनी अच्छी थी कि हैण्ड टू हैण्ड लाइक भी कर दी मैंने उसे 'HI' बोला उसने उसका जबाब HELLO में किया शुरुवात में उसने मेरे 'HY'  Hello पर थोडा कम ध्यान दिया | फिर शुरू हमारी बाते हो गयी दिन छोटा और लम्बी राते हो गयी | फिर इंट्रो हुआ वो मानो सागर की लहर सी थी इंट्रो में पता चला वो मेरे शहर की थी | बाते चलती गयी मिलने की बेचैनी बढती गयी फिर एक दिन उसने बोल दिया जो राज मै शुरू से मन में छिपाए बैठा था, उसने खोल दिया कि हमारी दोस्ती को बीत चुके हैं कितने रविवार सोमवार अब बहुत हुआ मिल लेते हैं ना यार वो बोल रही थी मै सुनता जा रहा था, उसकी बातों को सुनकर मै फूला नही समा रहा था | फिर क्या सोचा मिलना कहाँ हैं जहाँ बाते कर पाए मिलकर कुछ कहाँ ऐसी जगह हैं | फिर एक रेस्टोरेंट डिसाइड हुआ मैंने सुना और मै फेसबुक से साइड हुआ | फिर वो दिन आ गया जिसका इन्तजार था जिस दिन मिले हम वो रविवार था मै बेचैन था की कैसे उससे बात शुरू करूँगा कैसे कुछ कहूँगा हालांकि बाते तो बहुत करनी हैं मैंने अपने दिल को समझाया था उस दिन आसमान में सुनहरे बादल और जमी पर घास कुछ हरी लग रही थी मैंने देखा उसे एक नजर मानो वो बिलकुल परी लग रही थी | उसने बोला बैठो हमने सेक हैण्ड किया तभी उसने ऑर्डर भी दिया डोसा उसका फेवरेट था उसका जो था वो तो मेरा होना ही था | मैंने उससे बोला  मुझे कुछ कहना हैं उसने बोला बोलो जो भी कहना हैं इतना घबरा रहा था कि मै कुछ बोलूं उसे बुरा ना लगे इसलिए डोसा भी नही सही से खा पा रहा था | फिर आखिर मैंने दिल का कहना मान लिया उसके बिना कुछ कहे उसका हाथ थाम लिया वो मुस्कुराई फिर उसने मेरी तरफ आँखे दिखाई मैंने घबरा कर उसका हाथ छोड़ दिया उसने तो उसने तो दिल की बात कहने का ख्वाब ही तोड़ दिया | फिर मैंने सांसों को रोक लिया जो दिल में था एक सांस में सब कुछ बक दिया हंसकर उसमे बोला तुम सच में करते हो क्या मुझे प्यार अरे पागल जरा ठीक से तो करते इजहार मेरी फिर जान में जान आ गयी बड़ी मुस्किल के बाद वो मान गई |

पूरी दुनिया को छोड़कर मैंने उससे बेइन्तिहा प्यार किया हैं | बड़ी मुस्किल से मैंने अपने प्यार का इजहार किया हैं |

                                                                                                                                                       गोपाल की कलम से

 

 

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