आगे चला तू , आगे चला, एक सीधी लकीर सा आगे। ना रुका तू , ना थकातू , आगे चला तू , आगे चला ॥
क्या हुआ कुछ कठवाईया आ गई, तब भी तू नहीं रुका। नहीं हारा सिर्फ तू , आगे चला तू , आगे चला ॥
माना की लक्ष्य इतना सरल नहीं, तू डटा रहा तू अड्डा रहा। एक सीधी चट्टान सा खड़ा रहा, आगे चला तू , आगे चला ॥
माना की तूझे मंजिले नहीं मिली, तभी भी तू परिश्रम में लगा रहा। फल की चींता किए बगैर तू , आगे चला तू , आगे चला ||
एक दिन ऐसा आएगा, कठनाईया तूझसे पूछेगी। सीधा तू क्यू खड़ा रहा, आगे चला तू , आगे चला ॥
~युवराज सिंह
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