Essay on discipline | Importance of Discipline with Essay Outline | What is the importance of discipline in our life?

अनुशासन पर निबंध

अनुशासन पर छोटे तथा बड़े निबंध 

हिंदी निबंध: हिंदी हमारी राष्ट्रीय भाषा है। हमारे हिंदी भाषा कौशल को सीखना और सुधारना भारत के अधिकांश स्थानों में सेवा करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। स्कूली दिनों से ही हम हिंदी भाषा सीखते थे। कुछ स्कूल और कॉलेज हिंदी के अतिरिक्त बोर्ड और निबंध बोर्ड में निबंध लेखन का आयोजन करते हैं, छात्रों को बोर्ड परीक्षा में हिंदी निबंध लिखने की आवश्यकता होती है।

अनुशासन का महत्त्व – Importance Of Discipline

रूपरेखा- प्रस्तावना

              अनुशासन का तात्पर्य

              अनुशासनहीनता

              अनुशासन की शिक्षा

              अनुशासन का महत्त्व

               भारत और अनुशासन

                उपसंहार।

साथ ही, कक्षा 1 से 10 तक के छात्र उदाहरणों के साथ इस पृष्ठ से विभिन्न हिंदी निबंध विषय पा सकते हैं।

प्रस्तावना- स्वतंत्रता मानव के लिए वरदान है किन्तु स्वच्छन्दता नहीं। तंत्र के ऊपर स्व का बंधन ही स्वतंत्रता है। मनुष्य जो चाहे वह करने के लिए स्वतंत्र नहीं है, उसे देश तथा समाज के कुछ नियमों को मानना होता है, उनके नियंत्रण को स्वीकार करना होता है। नियमों को मानना तथा उनके अनुसार जीवन बिताना ही अनुशासन है। अनुशासन का तात्पर्य शासन शब्द से पूर्व अन उपसर्ग जोड़ने से अनुशासन बनता है। शासन अर्थात् नियंत्रण के पीछे चलना अर्थात् सामाजिक नियमों का पालन करते हुए जीवन बिताना ही अनुशासन है।

अनुशासन दो प्रकार का होता है-एक, बाह्य तथा दूसरा, आन्तरिक। देश, जाति, धर्म, समाज, संस्था आदि के नियमों को मानना, उनका पालन करना बाह्य अनुशासन कहलाता है। इन नियमों को भंग करने पर दण्ड की व्यवस्था होती है। बाह्य अनुशासन दण्ड के भय से मान्य होता है। आन्तरिक अनुशासन मन का अनुशासन होता है। मनुष्य स्वयं बिना किसी भय के अपना कर्त्तव्य समझते हुए जब नियमों का पालन करता है तो इसे आत्मानुशासन कहते हैं। आत्मानुशासन ही उत्तम प्रकार का अनुशासन होता है।

अनुशासनहीनता- अनुशासन, यदि मनुष्य को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाता है तो अनुशासनहीनता उसको अवनति के गर्त में धकेल देती है। अनुशासन का पालन करने वाला उद्दण्ड नहीं होता। वह सौम्य स्वभाव का होता है, वह अपना काम समय पर पूरा करता है। उग्र व्यवहार और कटु भाषण अनुशासनहीनता की पहचान हैं। प्रत्येक स्थान पर अपनी ही चलाना, अनुचित और असभ्य व्यवहार करना, विनम्रता का अभाव होना आदि अनुशासनहीनता के लक्षण हैं।

अनुशासन की शिक्षा- अनुशासन की शिक्षा का आरम्भ परिवार से होता है। बच्चा अपने बड़ों को यदि अनुशासित व्यवहार करते देखता है तो वह भी वैसा ही करता है। जिस परिवार में छोटे, बड़ों का सम्मान नहीं करते तथा बड़े, छोटों की भावनाओं का ध्यान नहीं रखते, वहाँ अनुशासन का अभाव होता है। इससे पारिवारिक वातावरण गड़बड़ा जाता है। परिवार से निकलकर बच्चा स्कूल जाता है। स्कूल के नियम कठोर होते हैं, उनका उल्लंघन करने से शिक्षा-प्राप्ति में बाधा पड़ती है। अनुशासन न मानने वाले अशिक्षित बच्चे समाज के लिए समस्या बनते हैं।

अनुशासन का महत्त्व- जीवन में अनुशासन का महत्त्वपूर्ण स्थान है। प्रकृति अपने समस्त कार्य अनुशासित रहकर ही करती है। मनुष्य भी अनुशासन के अनुकूल चलकर ही अपने जीवन में आगे बढ़ सकता है। अनुशासनहीनता लक्ष्य को पाने में बाधक होती है। अनुशासित मनुष्य संयमी, मृदु और मितभाषी होता है। उसका व्यवहार दूसरों के प्रति सम्वेदना और सहानुभूति से भरा होता है। इससे वह समाज में सभी का स्नेहपात्र बन जाता है, उसे सबका सहयोग मिलता है। इस प्रकार अनुशासन मनुष्य को जीवन में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करता है।

भारत और अनशासन- आज भारतीय समाज के सामने अनुशासन का पालन करने की गम्भीर समस्या है। विद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों में अनुशासनहीनता बढ़ी हुई है। राजनैतिक दल अपनी स्वार्थसिद्धि के लिए छात्रों में अनुशासनहीनता को बढ़ावा देते हैं। स्वार्थ और अर्थलाभ की प्रवृत्ति के बढ़ने के कारण देश और समाज में भयंकर अनुशासनहीनता व्याप्त है। राजनैतिक दलों में भी आन्तरिक अनुशासन की कमी है। समाज का मार्गदर्शन राजनीतिज्ञों द्वारा होता है। अनुशासनहीन राजनेता भारतीय समाज में बढ़ती हुई अनुशासनहीनता के लिए जिम्मेदार हैं।

उपसंहार- हमारा भारत विकास के पथ पर चल रहा है इस पथ पर वह अनुशासन का पालन करके ही सफलता के लक्ष्य को पा सकता है। अनुशासन की कमी उसके कदमों को बढ़ने से निश्चित ही रोकेगी। अतः देश के हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह अनुशासित जीवन बिताए।

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